वैद्य सत्य प्रकाश आर्य प्रसिद्ध नाडी विशेषज्ञ

Imageभारत में प्राचीन काल से ही जो चिकित्सा पद्धति प्रचलित थी, उसमें चिकित्सक  के पास जाकर मरीज को अपने रोग के बारे में बताने की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। बल्कि इसके उलट चिकित्सक , रोगी  की बाह्य एवं आंतरिक दशा देख और जांच कर उसकी परेशानी का शब्दस: वर्णन कर देता था। मसलन नाड़ी देख कर पूरे शरीर का हाल बता देना चिकित्सक का काम होता था। नाडी देख कर शरीर में चाहे जैसी भी बीमारी क्यों न हो, बीपी की शिकायत से लेकर कैंसर तक की स्थिति का ब्योरा, केवल व्यक्ति की नाड़ी देख कर बताया जा सकता था। आधुनिक युग में शरीर में स्थित रोगों की जांच के लिए कई तकनीकी मदद ली जाती हैं। लेकिन प्राचीन काल से शारीरिक परीक्षण की जो विधि प्रयोग में लाई जाती रही है वह नाड़ी ज्ञान ही है। आज भारत में इस प्राचीन विधा को जानने वाले बहुत कम वैद्य बचे हैं। जिनमें वैद्य सत्यप्रकाश आर्य का नाम बहुत सम्मान जनक तरीके से लिया जाता है। वैद्य सत्यप्रकाश आर्य जी न केवल भारत में बल्कि विदेशों तक में नाड़ी ज्ञान के लिए प्रसिद्ध है।
वैद्य सत्य प्रकाश आर्य जी का जन्म हरियाणा  के जिला सोनीपत स्थित गांव फरमाना में सन 1964 को हुआ था। आर्य जी के पिता मास्टर रामनारायण आर्य खुद एक वैदिक विज्ञान के ज्ञाता थे, उन्होंने आधुनिक युग में यज्ञ के महत्व पर सार्वजनिक रूप से कई हजार प्रदर्शन किये जिनमें यज्ञ के महत्व को दर्शाया गया। मसलन यज्ञ से बारीश कराने का प्रत्यक्ष प्रमाण उन्होंने अपने जीवन काल में हजारों बार दिया। वैद्य सत्यप्रकाश आर्य के यहाँ आज भी दैनिक यग्य की परंपरा जीवित है. रोजाना सुबह और शाम वैदिक ऋचाओ से यज्ञ होता है. जिसके प्रभाव में औषधियां तैयार की जाती है।

वैद्य सत्यप्रकाश आर्य ने वैद्य कुशलता एवं नाड़ी परीक्षण कला तो अपने नाना जी से अर्जित की, जिनके सानिध्यम में वह अपने बाल्यकाल से ही रहे। इनके नाना  स्व. मेहर सिंह दिल्ली के प्रसिद्ध वैद्य थे। उनके  द्वारा अनुभूत नुश्खे और आयुर्वेदिक योग आयुर्वेद जगत में आज भी बहुत कारगर हैं। वैद्य जी ने बाबा मस्तनाथ आयुवैदिक कॉलेज रोहतक से  बी ए एमस की डिग्री प्राप्त की। वैद्य जी ने न केवल आयुर्वेद में शिक्षा ग्रहण की बल्कि ज्योतिष शास्त्र का भी गहन अध्ययन किया। क्योंकि भारत में प्राचीन काल से ज्योतिष और आयुर्वेद को सम्मलित रूप से देख कर ही चिक्तिसा की जाती रही है।
पिछले 25 वर्षों से वैद्य सत्य प्रकाश आर्य निरंतर नाड़ी परीक्षण विधा से आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में कार्य कर रहे हैं।भारत ही नहीं, पूरे एसिया महाद्वीप एवं यूरोप के अधिकतम देशों में वैद्य सत्य प्रकाश आर्य चिकित्सक के रूप में निरंतर दौरा करते रहते हैं।
वैद्य सत्य प्रकाश आर्य नाड़ी देख कर शरीर की न केवल सभी व्याधियों  के बारे में पता लगाते हैं बल्कि उस रोग के  ठीक-ठीक कारण का पता लगा कर उस रोग का जड़ से निदान बताते हैं। मुख्य रूप से पुराने से पुराना सिर दर्द, माईग्रेन, सर्वाइकल,जोड़ों का दर्द, गठिया बाय, शुगर, ब्लडप्रेशर, अनिद्रा, उदर रोग, चर्म रोग जैसे लगभग सभी  पीड़ादायी रोगों के निवार्ण में वैद्य जी को महारत हांसिल हैं।
चिकित्सा जगत के अलावा वैद्य सत्य प्रकाश आर्य राष्ट्र-प्रेम की एक अलग मिसाल कायम कर रहे हैं। वैद्य जी देश के अमर शहीदों के प्रति विशेष श्रद्धा भावना और समर्पण के भाव से  भरे हैं। वैद्य सत्य प्रकाश आर्य नेता जी सुभाष चंद्र बोस के प्रबल समर्थकों में सुमार हैं। नेता जी जयंति के विराट आयोजनों से लेकर उनके विचारों के प्रचार प्रसार का कार्य वैद्य सत्य प्रकाश आर्य पिछले 30 वर्षों से निरंतर कर रहे हैं। राष्ट्र हित में गौशालाओं के उत्थान के लिए उनके द्वारा किये गये कार्य उल्लेखनीय हैं। गौशाला और राष्ट्रसेवा के उनके विशिष्ठ कार्यों के लिए उन्हें कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जा चुका है।
वैद्य सत्य प्रकाश आर्य मातृ-पितृ सेवा को ही परम् ईश्वर की भक्ति बताते हैं। उनका मानना है कि तीन माताओं की सेवा करना प्रत्येक व्यक्ति का धर्म हैं। और इन तीनों माताओं  के आर्शीवाद से भी  व्यक्ति जीवन में सुखी और स्वस्थ रह सकता है। जन्म देने वाली माता, भारत माता और गौमाता इन तीनों क सेवा करना प्रत्येक जीवधारी का पहला कर्तव्य है।
वैद्य सत्य प्रकाश आर्य धार्मिक उन्मादों से ऊपर उठ कर मानव मंदिर बनाने की कल्पना करते हैं। वैद्य सत्य प्रकाश आर्य वैदिक वांडमय की उत्तम जीवन पद्धति का प्रचार और प्रसार कर रहे हैं। देश भर में अनेकों स्थानों पर वैद्य सत्यप्रकाश आर्य के चिकित्सालय की शाखाएं निरंतर स्थापित हो रही हैं।
वैद्य सत्य प्रकाश आर्य का राष्ट्रवादी चिंतन उनके टीवी पर आ रहे साक्षात्कारों और कार्यक्रमों में परिलक्षित होता है। श्री आर्य जी न केवल एक उत्तम कोटि के चिकित्सक हैं बल्कि समर्पित राष्ट्र सेवक के रूप में भी निरंतर कार्यरत हैं।

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